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परेशाँ होके उसके दर पे जब इंसान जाता था - Rituraj kumar

परेशाँ होके उसके दर पे जब इंसान जाता था
ख़ुदा तब और था शायद जो सबकी मान जाता था

तू पहला शख़्स है जिससे कि धोखा खा गया वरना
मैं चेहरा देखकर इंसान को पहचान जाता था

किसी के लाख कहने पर भी अब गुमसुम ही रहता हूँ
किसी की एक बोली पर कभी मैं मान जाता था

तो घरवाले भी उसको छोड़ने कुछ दूर जाते थे
पुराने दौर में जब लौटकर मेहमान जाता था

मुझे हैरत कि कैसे कर लिया उसने मुझे अपना?
बड़ी मुश्किल से जिस लड़की पे मेरा ध्यान जाता था

- Rituraj kumar

Khuda Shayari

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