शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई सी तुमज़िन्दगी है धूप तो मद-मस्त पुर्वाई सी तुमचाहे महफ़िल में रहूँ चाहे अकेले में रहूँगूँजती रहती हो मुझ में शोख़ शहनाई सी तुम— Kunwar Bechain