पहले कहता है जुनूँ उस का गिरेबान पकड़फिर मेरा दिल मुझे कहता है इधर कान पकड़ऐसी वहशत भी न हो घर के दरो बाम कहेंकोई आवाज़ ही ले आ कोई मेहमान पकड़— Azbar Safeer