dushmani se ya kisi ko dosti se KHauf hai | दुश्मनी से या किसी को दोस्ती से ख़ौफ़ है

  - Rituraj kumar

दुश्मनी से या किसी को दोस्ती से ख़ौफ़ है
आदमी को अब तो केवल आदमी से ख़ौफ़ है

आप ये कहते हैं मुझ सेे 'डर नहीं मैं साथ हूँ'
सच तो ये है यार मुझको आप ही से ख़ौफ़ है

मेरी बर्बादी का किस्सा सुन लिया था इक दफ़ा
बस तभी से आशिक़ों को आशिक़ी से ख़ौफ़ है

चमचमाती आपकी दुनिया मुबारक़ आपको
हम तो अंधे हैं सो हमको रौशनी से ख़ौफ़ है

लाख सब कहते रहें 'इस ज़िंदगी से 'इश्क़ है'
पर हक़ीक़त ये है 'सबको ज़िंदगी से ख़ौफ़ है'

इस तरह डरने लगे हैं हम तुम्हारे 'इश्क़ से
जिस तरह से मुजरिमों को हथकड़ी से ख़ौफ़ है

  - Rituraj kumar

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