अच्छे-अच्छे शख़्स को इसने सितमगर कर दिया
इस सियासी ज़हर ने हम सब को पत्थर कर दिया
वो जो हाकिम जिस ने हरियाली को बंजर कर दिया
उस का दावा है कि उस ने मुल्क बेहतर कर दिया
उड़ रहे थे कल तलक हम सब फ़लक में हाँ मगर
वक़्त ने कैंची चलाया सब को बे-पर कर दिया
फिर इसी ज़ालिम को चुनने जा रहे हैं लोग ये
या'नी इसने फिर से कोई जादू-मंतर कर दिया
— Rituraj kumar















