अब दुआएँ पा रहा है हर दिल-ए-नाशाद कीक्या ग़ज़ब होगा वो जिस ने ख़ुद-कुशी ईजाद कीशा'इरी का ये हुनर कुछ देर से आया मगरजी-हुज़ूरी की नहीं मैं ने किसी उस्ताद की— Rituraj kumar