होंगे उस दिन आसमाँ पर
जाएँगे जिस दिन ज़मीं में
जाएँगे जिस दिन ज़मीं में
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मुँह को खोले आई है तन्हाई है
कितनी ठोकर खाई है तन्हाई है
कितनी ठोकर खाई है तन्हाई है
मुझ से ग़ुस्सा सारी तेरी बहने हैं
तुझ से ग़ुस्सा भाई है तन्हाई है
अपने ही वादों को तोड़ा है तू ने
किस की क़सम निभाई है तन्हाई है
उस के ग़म में चाक़ू उठाना था भाई
तू ने क़लम उठाई है तन्हाई है
इश्क़-ए-फ़ानी में चीज़ें मिलना तय है
ग़म है दुख है जुदाई है तन्हाई है
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मैं जितना भी कमाता हूँ
मैं ज़्यादा ही गँवाता हूँ
मैं ज़्यादा ही गँवाता हूँ
मैं लिखकर मौत काग़ज़ पर
मैं उस काग़ज़ को खाता हूँ
जो बारिश आते टूटा हो
मैं इक ऐसा ही छाता हूँ
मैं बस ग़ज़लों को सुनता हूँ
मैं सब ग़ज़लों को भाता हूँ
शब-ए-फ़ुर्क़त सुनानी है
शब-ए-फ़ुर्क़त सुनाता हूँ
तू जितना भी कमाता है
मैं उतना तो उड़ाता हूँ
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