दिल लगाया दिल लगाना ख़ूब है
मुड़ के उन का मुस्कुराना ख़ूब है
मुड़ के उन का मुस्कुराना ख़ूब है
इक हँसी से हो गई दुनिया हसीं
उस पे फिर सब कुछ गँवाना ख़ूब है
वो गले आ कर लगे हम से कभी
ख़्वाब में दिल बहल जाना ख़ूब है
चल पड़ा हूँ जिस गली राहत नहीं
हाँ मगर अब आना जाना ख़ूब है
वो मुख़ालिफ़ चाल ऐसी चल गया
जीतने से हार जाना ख़ूब है
मैं ने ख़ुद भी शर्त ए उल्फ़त मान ली
दिल लगी में जाँ लगाना ख़ूब है
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कभी भी उस ने मुझे ना पागल नहीं बनाया
हाँ क्या झगड़ना तो बात है कल नहीं बनाया
हाँ क्या झगड़ना तो बात है कल नहीं बनाया
जहाँ भी जाती मुझे हमेशा ही साथ रखती
ग़लत है मुझ को ख़ुदा ने काजल नहीं बनाया
मुझे भी ख़्वाहिश कभी अकेले गले लगाए
इसीलिए दोस्ती का सर्कल नहीं बनाया
कहाँ से तस्वीर ये मुकम्मल सी दिख रही है
अभी ये आँखें हैं सिर्फ़ डिम्पल नहीं बनाया
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कहाँ से तस्वीर ये मुकम्मल सी दिख रही है
अभी ये आँखें हैं सिर्फ़, डिम्पल नहीं बनाया
अभी ये आँखें हैं सिर्फ़, डिम्पल नहीं बनाया
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बिछड़ते वक़्त अब माथे पे मैं बोसे नहीं लूँगा
चली जाऊँ चली जाऊँ मैं धमकी पे नहीं लूँगा
चली जाऊँ चली जाऊँ मैं धमकी पे नहीं लूँगा
नहीं लूँगा ख़बर उस की कहा था वो तो ग़ुस्से में
ज़रा ले कर के दे दो तुम नहीं ख़ुद से नहीं लूँगा
ज़रा सी देर में भी यार कितनी देर होती है
अगर है मुंतज़िर कोई घड़ी उन से नहीं लूँगा
छुपा है नौकरी अल्फ़ाज़ में ही लफ़्ज़ नौकर तो
छुड़ा दी नौकरी अब मशवरे तुम से नहीं लूँगा
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