Neeraj Naveed

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    टूटा है मेरा ख़्वाब ला मुझको शराब दे
    वहशत है बे-हिसाब ला मुझको शराब दे

    पीते हैं क्यूँ शराब यहाँ लोग क्या पता
    ढूँढूँगा मैं जवाब ला मुझको शराब दे

    बे-शक ग़म-ओ-ख़ुशी में निभाती हो साथ पर
    मय चीज़ है ख़राब ला मुझको शराब दे

    क्या क्या गँवा दिया है मियाँ इस शराब में
    रक्खा नहीं हिसाब ला मुझको शराब दे

    रहता हूँ गर मैं होश में तो भूलता नहीं
    चेहरा वो माहताब ला मुझको शराब दे

    मुझसे तो एक इश्क़ भी पूरा न हो सका
    जीना हुआ अज़ाब ला मुझको शराब दे

    मेरी किताब-ए-ज़ीस्त में खुशियाँ थीं जिस जगह
    ख़ाली रहा वो बाब ला मुझको शराब दे
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    निगाहें आपकी क़ातिल हैं और प्यारी भी
    शिकार हो गया ख़ुद देखकर शिकारी भी

    नचा रही है इशारों पे अपने दुनिया को
    खुला ये राज़ के है ज़िंदगी मदारी भी

    यही है डर के वो सुनकर ख़फ़ा न हो जाए
    उसी से प्यार है हमको, उसी से यारी भी

    उसे ही भूल गए इंतिज़ार जिसका था
    कभी-कभार तो ऐसी रही ख़ुमारी भी

    ज़रा सी देर में करता है दिल क़यास कई
    अजीब चीज़ है ऐ दोस्त बे-क़रारी भी

    अभी ख़मोश है तू देखकर सितम मुझपर
    कर इंतिज़ार के आएगी तेरी बारी भी

    वो एक क़िस्सा कहानी न बन सका “नीरज”
    के मुख़्तसर ही रही दास्ताँ हमारी भी
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    अदा मोहब्बत हया मोहब्बत हँसी मोहब्बत नज़र मोहब्बत
    मैं जिसकी यादों में मुब्तिला हूँ वो शोख़ है सर-ब-सर मोहब्बत

    अभी मोहब्बत की इब्तिदा है हर एक मंज़र हसीं लगेगा
    हमारे जैसी ही होगी हालत करेगी जिस दिन असर मोहब्बत

    करो मोहब्बत की बात हमसे न दुनियादारी सिखाओ हमको
    हो जाए बे-शक ख़िलाफ़ दुनिया हम उस तरफ़ हैं जिधर मोहब्बत

    सभी की नज़रों से बच रहे हो मगर हक़ीक़त भी जान लो तुम
    छुपाओ कितना भी इसको लेकिन छपेगी बनकर ख़बर मोहब्बत

    ये ज़िंदगी वो सफ़र है जिसमें हमें है दरिया के पार जाना
    मगर किनारों के दरमियाँ है ये दिल की कश्ती, भँवर मोहब्बत

    ये प्यार है दिल्लगी नहीं है यक़ीन कर लो यक़ीन कर लो
    वगरना तुम भी यही कहोगे हुई तुम्हें भी अगर मोहब्बत
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    दोनों हैं अपनी ही धुन में पागल से
    प्यार हुआ है सहरा को इक बादल से

    चेहरा अबरू आँखें लब तो क्या कहिए
    दिल घायल है उसकी बिंदी काजल से

    ये दिल उसकी याद से यूँ वाबस्ता है
    वाबस्ता झनकार हो जैसे पायल से

    साक़ी आज इस पैमाने को दूर ही रख
    आज तो अपनी शर्त लगी है बोतल से

    बज़्म है यूँ रौशन उससे गोया उसने
    चाँद सितारें बाँध रखे हों आँचल से

    वो इक चाँद सा चेहरा जब से देखा है
    नीरज मुझको होश नहीं है उस पल से
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    मोहब्बत का नहीं इक दिन मुकर्रर
    मोहब्बत उम्रभर का सिलसिला है
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    तेरी चाहत ही मार डालेगी
    दिल की हसरत ही मार डालेगी

    ऐसा लगता है एक दिन मुझको
    ये मोहब्बत ही मार डालेगी

    तुमसे अब फ़ासला ही बेहतर है
    वर्ना ये लत ही मार डालेगी

    कुछ तो मर जाएंगे मुसीबत में
    कुछ को दहशत ही मार डालेगी

    मत बताओ के कैसे जीना है
    ये नसीहत ही मार डालेगी

    फिर किसी क़ैस को मुहब्बत में
    उसकी वहशत ही मार डालेगी

    दोनों रुसवा हुए मुहब्बत में
    उनको तोहमत ही मार डालेगी

    जो परिंदे क़फ़स में हैं, उनको
    ये हिफ़ाज़त ही मार डालेगी

    प्यार इंसान की ज़रूरत है
    ये ज़रूरत ही मार डालेगी
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    मोहब्बत शय है वो जिस पर किसी का बस नहीं चलता
    किसी से प्यार करने की इजाज़त कौन लेता है?
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    खो दिया उसने आज़मा के मुझे
    उस पे सबकुछ मैं वार सकता था
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    मुसाफ़िर हूँ, ठिकाना चाहता हूँ
    दिलों में आशियाना चाहता हूँ

    मैं जुगनू ही सही, ऐ चाँद तारो!
    अँधेरे को मिटाना चाहता हूँ

    मिलेगा जो मुक़द्दर में है, पर मैं
    मुक़द्दर आज़माना चाहता हूँ

    ग़ज़ल लिक्खी है इक तेरे लिए, सो
    तुझे मिलकर सुनाना चाहता हूँ

    उदासी से बहुत उकता गया मन
    मैं खुलकर मुस्कुराना चाहता हूँ

    तुम्हारी याद तो जीने न देगी
    मैं तुमको भूल जाना चाहता हूँ
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    ऐहतियातन कर दिए तस्वीर के टुकड़े, मगर
    कह रही थी दिल में मेरे तुम रहोगे उम्र भर

    चार दिन की ज़िंदगी है, तीन दिन तो कट गए
    एक दिन के वास्ते अब क्या करें कुछ माँगकर

    चाँद का भी अपना दुख है, जो कभी दिखता नहीं
    बीच तारों के भी वो रहता है तन्हा रातभर

    बस दिखावे की है हिम्मत, सच तो ये है मेरे दोस्त
    तेरी आँखें कह रही हैं, तुझको भी लगता है डर

    हौसला जो मर चुका था फिर से ज़िंदा हो गया
    जब चराग़ इक लड़ता देखा तीरगी से ता-सहर

    कौन कहता है जहाँ में जीतकर मिलता है सब
    हमने उनको पा लिया है अपना सब कुछ हारकर

    एक आदत ने उन्हें मजबूर इतना कर दिया
    सब परिंदे आ गए हैं फिर क़फ़स में लौटकर

    तेरी ख़ामोशी समझ लूँ, इतना मैं दाना नहीं
    इक इशारा मेरी जानिब कर, मोहब्बत है अगर
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    Neeraj Naveed
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