Neeraj Naveed

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@NeerajNaveed

Neeraj Naveed shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Neeraj Naveed's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

उस की हिम्मत की दाद दी जाए जो मोहब्बत में बे-वफ़ा न हुआ — Neeraj Naveed
मोहब्बत शय है वो जिस पर किसी का बस नहीं चलता किसी से प्यार करने की इजाज़त कौन लेता है? — Neeraj Naveed
इसे तो लोग जहन्नुम बता रहे हैं, ख़ुदा है तुझ सेे इल्तिजा ख़ुद आ के देख ले दुनिया — Neeraj Naveed
मोहब्बत का नहीं इक दिन मुकर्रर मोहब्बत उम्रभर का सिलसिला है — Neeraj Naveed
खो दिया उस ने आज़मा के मुझे उस पे सब कुछ मैं वार सकता था — Neeraj Naveed

Ghazal

क्या ज़रूरी है इसे प्यार ही समझा जाए क्यूँँ न इनकार को इनकार ही समझा जाए जब न मुमकिन हो मुलाक़ात तो यारो उस का ख़्वाब भी देखना दीदार ही समझा जाए क्या हक़ीक़त है ये चेहरे भी बयाँ करते हैं सो हर इक चेहरे को अख़बार ही समझा जाए मैं किसी तौर भी पीछे नहीं हटने वाला मेरी इस बात को ललकार ही समझा जाए हम जो मंज़िल की तरफ़ बढ़ न सके तब जाना डर को भी राह की दीवार ही समझा जाए शा'इरी के कई किरदार हक़ीक़त में नहीं या'नी किरदार को किरदार ही समझा जाए ऐ ख़ुदा! तेरे जहाँ में है अगर इश्क़ गुनाह फिर तो मुझ को भी गुनहगार ही समझा जाए — Neeraj Naveed
टूटा है मेरा ख़्वाब ला मुझ को शराब दे वहशत है बे-हिसाब ला मुझ को शराब दे पीते हैं क्यूँँ शराब यहाँ लोग क्या पता ढूँढूँगा मैं जवाब ला मुझ को शराब दे बे-शक ग़म-ओ-ख़ुशी में निभाती हो साथ पर मय चीज़ है ख़राब ला मुझ को शराब दे क्या क्या गँवा दिया है मियाँ इस शराब में रक्खा नहीं हिसाब ला मुझ को शराब दे रहता हूँ गर मैं होश में तो भूलता नहीं चेहरा वो माहताब ला मुझ को शराब दे मुझ सेे तो एक इश्क़ भी पूरा न हो सका जीना हुआ अज़ाब ला मुझ को शराब दे मेरी किताब-ए-ज़ीस्त में ख़ुशियाँ थीं जिस जगह ख़ाली रहा वो बाब ला मुझ को शराब दे — Neeraj Naveed
ऐहतियातन कर दिए तस्वीर के टुकड़े, मगर कह रही थी दिल में मेरे तुम रहोगे उम्र भर चार दिन की ज़िंदगी है, तीन दिन तो कट गए एक दिन के वास्ते अब क्या करें कुछ माँगकर चाँद का भी अपना दुख है, जो कभी दिखता नहीं बीच तारों के भी वो रहता है तन्हा रातभर बस दिखावे की है हिम्मत, सच तो ये है मेरे दोस्त तेरी आँखें कह रही हैं, तुझ को भी लगता है डर हौसला जो मर चुका था फिर से ज़िंदा हो गया जब चराग़ इक लड़ता देखा तीरगी से ता-सहर कौन कहता है जहाँ में जीत कर मिलता है सब हम ने उन को पा लिया है अपना सब कुछ हार कर एक आदत ने उन्हें मजबूर इतना कर दिया सब परिंदे आ गए हैं फिर क़फ़स में लौट कर तेरी ख़ामोशी समझ लूँ, इतना मैं दाना नहीं इक इशारा मेरी जानिब कर, मोहब्बत है अगर — Neeraj Naveed
अदा मोहब्बत हया मोहब्बत हँसी मोहब्बत नज़र मोहब्बत मैं जिस की यादों में मुब्तिला हूँ वो शोख़ है सर-ब-सर मोहब्बत अभी मोहब्बत की इब्तिदा है हर एक मंज़र हसीं लगेगा हमारे जैसी ही होगी हालत करेगी जिस दिन असर मोहब्बत करो मोहब्बत की बात हम सेे न दुनियादारी सिखाओ हम को हो जाए बे-शक ख़िलाफ़ दुनिया हम उस तरफ़ हैं जिधर मोहब्बत सभी की नज़रों से बच रहे हो मगर हक़ीक़त भी जान लो तुम छुपाओ कितना भी इस को लेकिन छपेगी बनकर ख़बर मोहब्बत ये ज़िंदगी वो सफ़र है जिस में हमें है दरिया के पार जाना मगर किनारों के दरमियाँ है ये दिल की कश्ती, भँवर मोहब्बत ये प्यार है दिल-लगी नहीं है यक़ीन कर लो यक़ीन कर लो वगरना तुम भी यही कहोगे हुई तुम्हें भी अगर मोहब्बत — Neeraj Naveed
पहले तो हम भी जीते थे बिंदास ज़िंदगी अब तो दिल-ओ-दिमाग पे तारी है आशिक़ी वो शख़्स मर चुका है फ़क़त जिस्म है वही मैं वो नहीं के जिस ने तुम्हें चाहा था कभी क़िस्सा तमाम हो गया ऐ दोस्त पर हमें है याद आजतक वो मुलाक़ात आख़िरी इक दूसरे से रहते हैं दोनों ख़फ़ा ख़फ़ा तक़दीर और इश्क़ की बनती नहीं कभी! मसरूफ़ियत का उस ने बहाना बना दिया हम भी समझ गए के मुहब्बत नहीं रही! सब ने किनारा कर लिया है देखते हैं अब कब तक हमारा साथ निभाती है ज़िंदगी ऐसा नहीं के प्यार में धोका मिला हमें हम को किसी बहाने तो करनी थी शा'इरी तेरा ही नाम ले के चिढ़ाते हैं मुझ को दोस्त हो बात कोई कहते हैं हाँ हाँ वही वही हालात हार जाते हैं हिम्मत के सामने जब ज़िंदगी का साथ निभाती है ज़िंदगी — Neeraj Naveed