sach hi lagta hai vo chahe jo kahe | सच ही लगता है वो चाहे जो कहे

  - Neeraj Naveed

सच ही लगता है वो चाहे जो कहे
झूठ पर इतनी महारत है उसे

ख़ामुशी से लड़ते लड़ते कहकहे
रफ़्ता-रफ़्ता ख़ामुशी में ढल गए

जिनकी ख़ातिर मुद्दतों ठहरे रहे
छोड़कर हमको वो आगे बढ़ गए

उसकी यादें साथ रहती हैं मेरे
उस सेे बिछड़े तो ज़माने हो गए

तू अकेला ही चला चल सोच मत
बनते- बनते ही बने हैं क़ाफ़िले

मुश्किलों में कुछ तो अच्छा हो गया
कौन अपने हैं वो पहचाने गए

हाँ डगर मुश्किल थी पर जान-ए-नवीद
दो क़दम तो साथ चलकर देखते

  - Neeraj Naveed

Aahat Shayari

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