मैं उसका राज वो सिमरन है मेरी
मिलूँ कैसे यही उलझन है मेरी
तिरी ख़ातिर मुसलसल लड़ रहा हूँ
ये दुनिया आज भी दुश्मन है मेरी
तिरी यादों के दीपक जल रहे हैं
अभी तक ज़िंदगी रोशन है मेरी
अगर पूछे ख़ुदा क्या चाहते हो
तो ख़्वाहिश फिर वही बचपन है मेरी
ग़मों से दोस्ती जब से हुई है
ख़ुशी से तो बहुत अनबन है मेरी
निभाएगी वो हरदम साथ मेरा
उदासी कहती है दुल्हन है मेरी
मिरा उस सेे है क्या रिश्ता? तो सुन लो
मैं दिल हूँ और वो धड़कन है मेरी
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