main uskaa raaj vo simran hai meri | मैं उसका राज वो सिमरन है मेरी

  - Neeraj Naveed

मैं उसका राज वो सिमरन है मेरी
मिलूँ कैसे यही उलझन है मेरी

तिरी ख़ातिर मुसलसल लड़ रहा हूँ
ये दुनिया आज भी दुश्मन है मेरी

तिरी यादों के दीपक जल रहे हैं
अभी तक ज़िंदगी रोशन है मेरी

अगर पूछे ख़ुदा क्या चाहते हो
तो ख़्वाहिश फिर वही बचपन है मेरी

ग़मों से दोस्ती जब से हुई है
ख़ुशी से तो बहुत अनबन है मेरी

निभाएगी वो हरदम साथ मेरा
उदासी कहती है दुल्हन है मेरी

मिरा उस सेे है क्या रिश्ता? तो सुन लो
मैं दिल हूँ और वो धड़कन है मेरी

  - Neeraj Naveed

Dushmani Shayari

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