ज़रूरतों के मुताबिक़ जो ढल गया होता

तो फिर मैं मैं नहीं रहता बदल गया होता

मैं तेरी याद से आगे निकल गया होता
किसी तरह जो मेरा दिल बहल गया होता

वो मैं ही हूँ कि वहाँ सच कहा हुज़ूर जहाँ
जो चाहता तो मेरा झूठ चल गया होता

ये लग रहा है नहीं था असर दु'आओं में
वगरना हादसा होने से टल गया होता

कमाल क्या कि कोई इश्क़ का असीर हुआ
कमाल ये था कि बचकर निकल गया होता

नहीं की कोशिशें और हार मान ली नीरज
जो चाहते कोई रस्ता निकल गया होता

— Neeraj Naveed

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