चाँद का आज नज़ारा भी हो सकता है

शे'र कोई शह-पारा भी हो सकता है

दुनिया जिस को पागल कहती है यारो
कोई प्यार का मारा भी हो सकता है

क्यूँ हर बात पे तेरा मेरा कहते हो
ये संसार हमारा भी हो सकता है

एक ग़ज़ल में नाम बताऊँगा उस का
और वो नाम तुम्हारा भी हो सकता है

तुम से मिल कर ही हम को एहसास हुआ
कोई इतना प्यारा भी हो सकता है

होंठों पर पहरे बिठलाकर क्या होगा
आँख का एक इशारा भी हो सकता है

कर के इरादा जाने का फिर मत रुकना
वर्ना प्यार दोबारा भी हो सकता है

कब सोचा था “नीरज” हम ने उस का ग़म
यूँ जीने का सहारा भी हो सकता है

— Neeraj Naveed

More by Neeraj Naveed

Other ghazal from the same pen

See all from Neeraj Naveed →

Haseen Shayari

Shers of haseen.

All Haseen Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling