ye udaasi jo chha rahi hai dost | ये उदासी जो छा रही है दोस्त

  - Neeraj Naveed

ये उदासी जो छा रही है दोस्त
हौसला आज़मा रही है दोस्त

आज हिम्मत रखो यक़ीनन कल
ज़िंदगी मुस्कुरा रही है दोस्त

सोचता था तुझे समझता हूँ
यही मेरी ख़ता रही है दोस्त

बेवफ़ा है वो पर लगेगा यही
बस तुम्हीं से निभा रही है दोस्त

वो जिसे भूलने की कोशिश है
वो बहुत याद आ रही है दोस्त

तुम तो सब सच ही कह रहे हो ना
क्यूँँ ज़बाँ लड़खड़ा रही है दोस्त

ज़िंदगी का ग़ुमान मत करना
ज़िंदगी बेवफ़ा रही है दोस्त

  - Neeraj Naveed

Mehnat Shayari

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