Tariq Qamar

Tariq Qamar

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Tariq Qamar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Tariq Qamar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

मेरे तो ग़म भी ज़माने के काम आते हैं मैं रो पड़ूँ तो कई लोग मुस्कुराते हैं — Tariq Qamar
इस दुनिया का हर मंसूबा हर कोशिश बेकार हुई इक बच्चे ने हाथ बढ़ाया चाँद को छू कर देख लिया — Tariq Qamar

Ghazal

उस ने इक बार भी पूछा नहीं कैसा हूँ मैं ख़ुद को भी जिस के लिए हार के बैठा हूँ मैं फूल होने की सज़ा ख़ूब मिली है मुझ को शाख़ से टूट के गुल-दान में रक्खा हूँ मैं चलता रहता हूँ तो लगता है कोई साथ में है थक के बैठूँगा तो याद आएगा तन्हा हूँ मैं गुम हुआ ख़ुद में तो इक नुक़्ता-ए-मौहूम हुआ मुन्कशिफ़ होते ही अतराफ़ पे छाया हूँ मैं इस सलीक़े से मुझे क़त्ल किया है उस ने अब भी दुनिया ये समझती है कि ज़िंदा हूँ मैं फिर अचानक ये हुआ जीत गई ये दुनिया मैं समझता था कि बस जीतने वाला हूँ मैं वो भी रस्मन यही पूछेगा कि कैसे हो तुम मैं भी हँसते हुए कह दूँगा कि अच्छा हूँ मैं — Tariq Qamar