dono hain apni hi dhun men paagal se | दोनों हैं अपनी ही धुन में पागल से

  - Neeraj Naveed

दोनों हैं अपनी ही धुन में पागल से
प्यार हुआ है सहरा को इक बादल से

चेहरा अबरू आँखें लब तो क्या कहिए
दिल घायल है उसकी बिंदी काजल से

ये दिल उसकी याद से यूँँ वाबस्ता है
वाबस्ता झनकार हो जैसे पायल से

साक़ी आज इस पैमाने को दूर ही रख
आज तो अपनी शर्त लगी है बोतल से

बज़्म है यूँँ रौशन उस सेे गोया उसने
चाँद सितारें बाँध रखे हों आँचल से

वो इक चाँद सा चेहरा जब से देखा है
नीरज मुझको होश नहीं है उस पल से

  - Neeraj Naveed

Chehra Shayari

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