दोनों हैं अपनी ही धुन में पागल से
प्यार हुआ है सहरा को इक बादल से
चेहरा अबरू आँखें लब तो क्या कहिए
दिल घायल है उसकी बिंदी काजल से
ये दिल उसकी याद से यूँँ वाबस्ता है
वाबस्ता झनकार हो जैसे पायल से
साक़ी आज इस पैमाने को दूर ही रख
आज तो अपनी शर्त लगी है बोतल से
बज़्म है यूँँ रौशन उस सेे गोया उसने
चाँद सितारें बाँध रखे हों आँचल से
वो इक चाँद सा चेहरा जब से देखा है
नीरज मुझको होश नहीं है उस पल से
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