अदा मोहब्बत हया मोहब्बत हँसी मोहब्बत नज़र मोहब्बत

मैं जिस की यादों में मुब्तिला हूँ वो शोख़ है सर-ब-सर मोहब्बत

अभी मोहब्बत की इब्तिदा है हर एक मंज़र हसीं लगेगा
हमारे जैसी ही होगी हालत करेगी जिस दिन असर मोहब्बत

करो मोहब्बत की बात हम से न दुनियादारी सिखाओ हम को
हो जाए बे-शक ख़िलाफ़ दुनिया हम उस तरफ़ हैं जिधर मोहब्बत

सभी की नज़रों से बच रहे हो मगर हक़ीक़त भी जान लो तुम
छुपाओ कितना भी इस को लेकिन छपेगी बनकर ख़बर मोहब्बत

ये ज़िंदगी वो सफ़र है जिस
में हमें है दरिया के पार जाना
मगर किनारों के दरमियाँ है ये दिल की कश्ती, भँवर मोहब्बत

ये प्यार है दिल-लगी नहीं है यक़ीन कर लो यक़ीन कर लो
वगरना तुम भी यही कहोगे हुई तुम्हें भी अगर मोहब्बत

— Neeraj Naveed

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