तुझे ख़याल नहीं है सो हम बढ़ा रहे हैंफिर इक दफ़ा तेरी ज़ानिब क़दम बढ़ा रहे हैंबहुत से आए तुझे जीतने की ख़्वाहिश मेंहम एक कोने में बैठे रक़म बढ़ा रहे हैं— Zahid Bashir