बिछड़ते वक़्त अब माथे पे मैं बोसे नहीं लूँगा
चली जाऊँ चली जाऊँ मैं धमकी पे नहीं लूँगा
नहीं लूँगा ख़बर उस की कहा था वो तो ग़ुस्से में
ज़रा ले कर के दे दो तुम नहीं ख़ुद से नहीं लूँगा
ज़रा सी देर में भी यार कितनी देर होती है
अगर है मुंतज़िर कोई घड़ी उन से नहीं लूँगा
छुपा है नौकरी अल्फ़ाज़ में ही लफ़्ज़ नौकर तो
छुड़ा दी नौकरी अब मशवरे तुम से नहीं लूँगा
— Piyush Sharma















