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नहीं थकते मुझे इल्ज़ाम देते
भला कब तक ये बेरहमी करोगे
भला कब तक ये बेरहमी करोगे
अगर सच बोलने मैं लग गया तो
ग़लत फ़हमी ग़लत फ़हमी करोगे
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मुझ से बढ़ कर कोई पागल क्या होगा
मैं सपने में ग़ज़लें पढ़ता रहता हूँ
मैं सपने में ग़ज़लें पढ़ता रहता हूँ
मेरे ख़ातिर तू दुनिया से लड़ता है
मैं कैसा हूँ तुझ से लड़ता रहता हूँ
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सभी तारीफ हैं बस ख़ामखा़ की
हमारा दिल कहाँ देखा किसी ने
हमारा दिल कहाँ देखा किसी ने
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तेरा रुख़सत होना अब भी बाक़ी है
तेरी ख़ुशबू परछाईं से आती है
तेरी ख़ुशबू परछाईं से आती है
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