ख़ुद को सबसे जुदा समझते हो
यार तुम ख़ुद को क्या समझते हो
शेर तो सुन रहे हो तुम मेरे
क्या मिरा फ़लसफा़ समझते हो
यार तुम किस जहाँ से आए हो
प्यार को तुम वफ़ा समझते हो
फिर मेरे साथ तुम भला क्यों हो
तुम तो अच्छा बुरा समझते हो
तुम मेरा हाल पूछते थे ना
रात भर जागना समझते हो
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