मुझ सेे बढ़ कर कोई पागल क्या होगामैं सपने में ग़ज़लें पढ़ता रहता हूँमेरे ख़ातिर तू दुनिया से लड़ता हैमैं कैसा हूँ तुझ से लड़ता रहता हूँ— Gopesh "Tanha"