सजा कर फूल बालों में हमारे पास आते हैं
अदब से बैठ के कुछ देर फिर गज़लें सुनाते हैं
गिरा कर ज़ुल्फ़ अपनी फिर अदा-ए-नाज़ से बोलें
सुनो हम प्यार में लोगों को, यूँ पागल बनाते हैं
तुमसे बिछड़े तो हम किसी कहानी में मरेंगें
बचपन की मेरी ख्वा़हिश अब ज़वानी में मरेंगें
करेंगें ज़ुल्म उन पर और उन्हें हम भूल जाएंगे
हमें ये बात भी उनको इशारों में बतानी है