वहीं से हार कर लौटा मुसाफ़िर
जहाँ से जीत कर जाना भला था
जहाँ से जीत कर जाना भला था
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मैं अमानत हुआ था कितनों की
बा'द में कह दिया पिया तुम ने
बा'द में कह दिया पिया तुम ने
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जिस्म से रूह ज्यूँ निकलती है
बेटियाँ माँ के घर से जाती हैं
बेटियाँ माँ के घर से जाती हैं
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किसी जर्जर 'इमारत को सहारा कौन देता है
रहो नाकाम तो अवसर दुबारा कौन देता है
रहो नाकाम तो अवसर दुबारा कौन देता है
यहाँ किस को पड़ी है कौन जीता कौन मरता है
यहाँ ता- उम्र बेबस को गुज़ारा कौन देता है
किसी से जब मिलो तो फ़ासला कुछ दूर का रखना
नदी डूबे समुंदर में किनारा कौन देता है
यहाँ उपहार भी पाने की ख़ातिर हैं दिए जाते
भला मुफ़लिस को खाने को छुहारा कौन देता है
अदब इंसान की 'आदत में शामिल हो ही जाती है
हुए रुख़्सत को रुकने का इशारा कौन देता है
यहाँ सब लोग मिट्टी से बने हैं जानते हैं सब
मगर मिट्टी को उस का मोल सारा कौन देता है
फ़क़त आसान है आँखों में 'शुभ' सपने सजाना भी
मगर हर एक को टूटा सितारा कौन देता है
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इश्क़ मोहब्बत तन्हा रातें छोड़ो ना
उन की बातें उन की बातें छोड़ो ना
उन की बातें उन की बातें छोड़ो ना
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