अब कि इतना भी सच न बोलो तुम
कि जुबाँ से कोई छुरे लगो तुम
और बहुत ज़्यादा अच्छे भी न बनो
कि सभी को बहुत बुरे लगो तुम
तेरे नाम से जुड़ा है मेरा नाम देख तू
मेरे दर्द को समझ मेरा कलाम देख तू
अब नहीं है मैकदे की हमको चाह भी कोई
भर चुका है अश्कों से मेरा ये जाम देख तू
आज ईद का ये दिन ख़ुदा है हश्र की तरह
चाँद के बग़ैर जो हुई ये शाम देख तू
माँगने को उस ख़ुदा से तुम को मेरी जान मैं
नास्तिक से हो गया हूँ अब इमाम देख तू
सूखे पत्तों की तरह हैं प्रिंस रेज़ा रेज़ा हम
इश्क़ का हमें मिला है जो इनाम देख तू
जीने की तमन्ना हमने छोड़ दी है प्रिंस अब
काम हो रहा है मेरा अब तमाम देख तू
तेरा बुत तो नहीं था पास मेरे,
तेरी यादों को अपने पास रखा
गोया हस्ते हुए भी हमने सदा,
अपने दिल को बहुत उदास रखा
मुझे तुम पूछते हो प्यार क्या है
बता आख़िर बला ये यार क्या है
कि सारी देखने की बात है बस
भला गुल और फिर यह खा़र क्या है
कि ख़ुदको ज़र्फ़ वाला मानते हो,
बता यह पीठ पर फिर वार क्या है
बता कब देखता है इश्क़ हालत,
भला मुश्ताक़ या बेज़ार क्या है
कहा था याद आओगे न तुम फिर,
ये दिल में यार हाहाकार क्या है
कि ख़ुद ही कर खफ़ा वो प्रिंस हमको
वो ख़ुद ही पूछते हैं सार क्या है
बोल कैसे करें दवा दिल की
ज़ख़्म जब बेहिसाब हो जाए
क्यूँ ये बदशक्ल हैं नज़र आते
जब ये मुँह बेनक़ाब हो जाए