आदत मुझ को कोई नहीं है बुरी
    इक उस शख़्स की ही लत लगी थी
    Sanjay Vyas 'Sahiba'
    1 Like
    शादी में बुलाते हैं दोस्त को
    आशिक़ और दीवानों को नहीं
    Sanjay Vyas 'Sahiba'
    1 Like
    ख़्वाब जो देखा न हो मैंने
    वो हकीक़त कैसे ही होगा
    Sanjay Vyas 'Sahiba'
    1 Like
    आया हूँ ये सोच कर तेरे दर पे मैं
    कोई है जो हसरतें पूरी करता है
    Sanjay Vyas 'Sahiba'
    1 Like
    दुआओं में तो माँगा था उसको मैं ने
    ख़ुदा की नवाज़िश किसी और पे थी
    Sanjay Vyas 'Sahiba'
    2 Likes
    इक शख़्स रोज़ धूप में बैठे हुए ही जल गया
    एसी में बैठे लोगों को रोटी जली हुई लगी
    Sanjay Vyas 'Sahiba'
    1 Like
    हुआ नहीं है कुछ ये तो ख़ुमारी है
    मुझे तो सिर्फ़ ‘जॉन’ की बिमारी है
    Sanjay Vyas 'Sahiba'
    2 Likes
    मैंने लिखा है ख़ुद ही ये मुक़द्दर
    हाथों की लकीरें मिटा दी मैं ने
    Sanjay Vyas 'Sahiba'
    1 Like
    तुम नहीं देखती आईना
    आईना देखता है तुम्हें
    Sanjay Vyas 'Sahiba'
    2 Likes
    इश्क़ का इतना सा फ़साना है
    इक मुलाक़ात को तरसते हैं
    Sanjay Vyas 'Sahiba'
    4 Likes

Top 10 of Similar Writers