हमारा दिल भला अब क्या लगेगा
    हमारा दिल तो तुमसे लग चुका है
    Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
    1 Like
    तेरे आँचल तले बचपन सजा माँ
    उसी में लौट जाना चाहता हूँ

    मेरी पलकों पे अपने होंठ रख दे
    मैं फ़िर सपने सजाना चाहता हूँ
    Read Full
    Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
    4 Likes
    कभी फुटपाथ पर कोई न सोए
    मैं "उज्ज्वल" आशियाना चाहता हूं
    Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
    4 Likes
    पिता के कांध पर राजा सा बैठा
    वहीं बचपन सुहाना चाहता हूं

    वो दादी की कहानी रात वाली
    उसी में लौट जाना चाहता हूं
    Read Full
    Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
    3 Likes
    मुझे तुम याद ना आना कभी भी
    मैं तुमको भूल जाना चाहता हूँ

    सताएं हिज़्र की रातें तुम्हें भी
    मैं इतना याद आना चाहता हूँ
    Read Full
    Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
    2 Likes
    नया इक घर बनाना चाहता हूँ
    जहाँ तुझको बसाना चाहता हूँ

    तुझे दिल के बहुत ही पास रखकर
    तुझे हर गम दिखाना चाहता हूँ
    Read Full
    Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
    3 Likes
    वफा के नाम पर हमसे ज़फा करता रहा जो दिल
    हमारी नींद सपने सब वो पल भर में उड़ा निकला
    Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
    3 Likes
    बुरी आदत सुरा पीना जो कहता था सदा मुझसे
    उसी के पास से देखो कि कैसे हैं सुरा निकला
    Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
    2 Likes
    लुटा दूंगा मैं अपनी जान तक तेरे लिए जानूं
    वो कहता था मगर इक दिन मेरी ही जां चुरा निकला
    Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
    2 Likes
    जिसे समझा बहुत अच्छा वहीं कितना बुरा निकला
    मेरा ही यार हाथों में लिए कट्टा छुरा निकला
    Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
    4 Likes

Top 10 of Similar Writers