Ankur Mishra

Top 10 of Ankur Mishra

    ख़ुद को ख़ुद से जुदा कर लिया
    ख़ुद पे क्यूँ एतिदा कर लिया

    उम्र गुज़रेगी रो रो के अब
    जाॅं जो उस पे फ़िदा कर लिया

    जाऊँ कैसे ये घर छोड़ के
    छत को ही जब रिदा कर लिया

    हाल मत पूछो मेरा बशर
    क्या ये हम ने ख़ुदा कर लिया
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    Ankur Mishra
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    हर दफ़ा ख़ुद से हारा हूँ मैं
    टूटता इक सितारा हूँ मैं

    भर लो आग़ोश में मुझ को तुम
    आज भी बे-सहारा हूँ मैं

    जाने कब से हूँ बेघर यहाँ
    जैसे कोई किनारा हूँ मैं

    आके देखो तबीयत मेरी
    अपना ख़ुद ही सहारा हूँ मैं
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    Ankur Mishra
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    सुब्ह से शाम हो जाती है
    ज़िंदगी आम हो जाती है

    सोचूँ जब भी उसे मैं कभी
    रात बदनाम हो जाती है

    कैसे उस से वफ़ा मैं करूँ
    प्यास ये ताम हो जाती है

    मुझ से मत पूछो हालत मेरी
    लड़की बदनाम हो जाती है
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    Ankur Mishra
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    ख़ामुशी की मार हैं हम
    दर-ब-दर बेज़ार हैं हम

    थाम लो बाहों में अपनी
    थोड़े से बीमार हैं हम

    तू ही अपना है हमारा
    तेरे पहरेदार हैं हम

    है ख़ुदा माना तुझे फिर
    ग़म से क्यूँ दो चार हैं हम

    है तू बाक़ी हम में अब भी
    कश्ती तू पतवार हैं हम
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    Ankur Mishra
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    नाम अब उस का बताने से रहे
    हम ये पर्दा अब उठाने से रहे

    एक मुद्दत तक तलाशा है उसे
    कर्ज़ कोई हम चुकाने से रहे

    आके ले ले कोई चाहे इम्तिहान
    हम कोई पर्चा दिखाने से रहे

    हमनें सब से ही रखा है फ़ासला
    तुम हमें अब आज़माने से रहे

    हम निकल आए हैं उस दर से भी अब
    हम वफ़ा तुम से निभाने से रहे
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    Ankur Mishra
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    हम ने ख़ुद से भी उल्फ़त नहीं की
    बा'द उस के मोहब्बत नहीं की

    मर गया मुझ
    में मैं पर किसी ने
    उस से कोई शिकायत नहीं की

    छोड़ दूँ कैसे मैं आदत उस की
    जिस की हमनें हिफ़ाज़त नहीं की

    ख़ुद न दुश्मन हो जाएँ ख़ुदी के
    इस लिए बस बग़ावत नहीं की

    मैं हूँ वाक़िफ़ ज़माने से अंकुर
    इस लिए कोई चाहत नहीं की
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    Ankur Mishra
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    मिलती जुलती वो सूरत नज़र आती है
    हर किसी की ज़रूरत नज़र आती है

    रुक सी जाती हैं नज़रें उसी पे ही बस
    सादगी की वो मूरत नज़र आती है

    कैसे रोकूॅं मैं ख़ुद को फ़ना होने से
    ये मोहब्बत कुदूरत नज़र आती है

    पास मेरे नहीं कुछ सिवा मेरे अब
    उस की अब फिर ज़रूरत नज़र आती है
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    Ankur Mishra
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    दिल दुखा कर भी ठहरा हुआ है
    किस क़दर इश्क़ गहरा हुआ है

    मुझ से मत पूछो अब हाल मेरा
    ये समुंदर भी सहरा हुआ है

    सच कहूँ पास कुछ भी नहीं पर
    दर्द कब से ये ठहरा हुआ है

    मैं निकल आया उस दर से भी अब
    जब से खिड़की पे पहरा हुआ है
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    Ankur Mishra
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    मुकम्मल कुछ नहीं होता
    लहू कोई नहीं धोता

    किसी को क्या कहूँ मैं अब
    मैं ख़ुद भी तो नहीं रोता

    जिसे देखो है तन्हा पर
    जुदा कोई नहीं होता

    है परखा मैं ने ख़ुद को भी
    कोई अपना नहीं होता
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    Ankur Mishra
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