सुब्ह से शाम हो जाती है
ज़िंदगी आम हो जाती है
सोचूँ जब भी उसे मैं कभी
रात बदनाम हो जाती है
कैसे उस से वफ़ा मैं करूँ
प्यास ये ताम हो जाती है
मुझ से मत पूछो हालत मेरी
लड़की बदनाम हो जाती है
— Ankur Mishra
ज़िंदगी आम हो जाती है
सोचूँ जब भी उसे मैं कभी
रात बदनाम हो जाती है
कैसे उस से वफ़ा मैं करूँ
प्यास ये ताम हो जाती है
मुझ से मत पूछो हालत मेरी
लड़की बदनाम हो जाती है
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