अपनी बाँहों में ऐसे सुलाए हुए
सारे नग़्मा मोहब्बत के गाने लगे
सारे नग़्मा मोहब्बत के गाने लगे
अब जो 'महमूद' ख़त लिख के छोड़े हो जो
ख़ुद ही पढ़ के वो मुझ को सुनाने लगे
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किसी के इश्क़ में खो के बैठा हूँ
मैं उस की याद में रो के बैठा हूँ
मैं उस की याद में रो के बैठा हूँ
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लबों पे आए जो नाम तेरा वही तो है ये पयाम मेरा
कभी ख़ुशी में कही ग़मी में तुझी पे है ये सलाम मेरा
कभी ख़ुशी में कही ग़मी में तुझी पे है ये सलाम मेरा
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काग़ज़ की कश्ती कभी हम भी बनाया करते थे
वो बचपन में जहाज़ हम भी उड़ाया करते थे
वो बचपन में जहाज़ हम भी उड़ाया करते थे
अफ़सोस वो तो दिन ही चला गया है अब 'महमूद'
वगर्ना हम भी इनसे कहाँ बाज़ आया करते थे
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