मुझको ये नज़र आया के वो एक बला है
    कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज -ए- अदा है

    वो ग़ैर की आगोश में रहने लगा शादाँ
    उसको नहीं मालूम के दिल मेरा जला है
    Read Full
    Navneet krishna
    4 Likes
    किसी दिन वो सुनेगा भी
    परायों का सुनाता है
    Navneet krishna
    6 Likes
    एक क़िस्सा वफ़ा का सुना दीजिए
    दर्दे दिल को ज़रा अब बढ़ा दीजिए

    मेरे अल्ला कब तक शब-ए-हिज्र ये
    मुझको महबूब से फिर मिला दीजिए
    Read Full
    Navneet krishna
    6 Likes
    ज़ख़्मों पे ज़ख़्म खाए ज़माने गुज़र गए
    पत्थर भी घर में आए ज़माने गुज़र गए

    मेरी निगाह अब भी उसी सिम्त है मगर
    खिड़की पे उसको आए ज़माने गुज़र गए
    Read Full
    Navneet krishna
    6 Likes
    इश्क़ में धोखा खाने वाले
    हम है दर्द छुपाने वाले

    तुमको इक दिन आना होगा
    रूठ के मुझसे जाने वाले
    Read Full
    Navneet krishna
    6 Likes
    तोड़ डाला नशा को तेरी याद ने
    होश में ऐसे मैं आज आता नहीं
    Navneet krishna
    4 Likes
    इन हवाओं में ज़रा सी खुशबू हज़रत घोलिये
    थोड़ी हिंदी थोड़ी सी उर्दू यहाँ पर बोलिये
    Navneet krishna
    6 Likes
    दोस्ती की है अगर तू ने निभाऊँगा जरूर
    कर्ज़ अपना मैं मेरे यार चुकाऊँगा ज़रूर

    जब तेरे सामने जाने की कभी सोचूँगा
    इन निगाहों में नया ख़्वाब सजाऊँगा ज़रूर
    Read Full
    Navneet krishna
    7 Likes
    लोग बेचैन हैं बाजार में छाने के लिए
    कुछ तो गिर जाते हैं अख़बार में आने के लिए
    Navneet krishna
    7 Likes
    वक़्त पे काम अब कोई आता नहीं
    साथ गर्दिश में अपना निभाता नहीं

    हाथ यूं तो मिलाते है अक्सर यहाँ
    दिल से दिल आज कोई मिलाता नहीं
    Read Full
    Navneet krishna
    10 Likes

Top 10 of Similar Writers