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तेरी बातों में हम रह गए
ख़ुदस ग़ाफ़िल सनम रह गए
ख़ुदस ग़ाफ़िल सनम रह गए
उन को दुनिया की सब राहतें
मेरे हिस्से में ग़म रह गए
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ज़ख़्मों पे ज़ख़्म खाए ज़माने गुज़र गए
पत्थर भी घर में आए ज़माने गुज़र गए
पत्थर भी घर में आए ज़माने गुज़र गए
मेरी निगाह अब भी उसी सिम्त है मगर
खिड़की पे उस को आए ज़माने गुज़र गए
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इश्क़ में धोखा खाने वाले
हम है दर्द छुपाने वाले
हम है दर्द छुपाने वाले
तुम को इक दिन आना होगा
रूठ के मुझ से जाने वाले
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इन हवाओं में ज़रा सी ख़ुशबू हज़रत घोलिए
थोड़ी हिंदी थोड़ी सी उर्दू यहाँ पर बोलिए
थोड़ी हिंदी थोड़ी सी उर्दू यहाँ पर बोलिए
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दोस्ती की है अगर तू ने निभाऊँगा जरूर
क़र्ज़ अपना मैं मेरे यार चुकाऊँगा ज़रूर
क़र्ज़ अपना मैं मेरे यार चुकाऊँगा ज़रूर
जब तेरे सामने जाने की कभी सोचूँगा
इन निगाहों में नया ख़्वाब सजाऊँगा ज़रूर
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वक़्त पे काम अब कोई आता नहीं
साथ गर्दिश में अपना निभाता नहीं
साथ गर्दिश में अपना निभाता नहीं
हाथ यूँ तो मिलाते है अक्सर यहाँ
दिल से दिल आज कोई मिलाता नहीं
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