गुलशन मिले चुनने बहुत से ख़ार में
    डूबा दिल-ए-नादाँ तिरे ही प्यार में

    अपनी जवानी में कमाने आ गया
    मिलता हूँ अपने गाँव से अख़बार में

    ओछा तिरा लगने लगा रंग-ए-जहाँ
    रंगों का कारोबार देखा यार में
    Read Full
    Rizwan Khoja "Kalp"
    2 Likes
    लोग चाहे ज़ुल्म बरताएँ तुझी पर
    मुस्कुरा के उन सभी का तू भला कर
    Rizwan Khoja "Kalp"
    0 Likes
    सोचता हूँ दर्द अपने फूँक डालूॅं
    जिस्म तेरा सर्द रातों में जला कर
    Rizwan Khoja "Kalp"
    1 Like
    पेड़ गिन काटी थी राहें
    ख़र्च गिन कर कट रही है

    अम्न की उम्मीद में हैं
    और नफ़रत बट रही है
    Read Full
    Rizwan Khoja "Kalp"
    0 Likes
    क्या लुत्फ़ आज़ादी का है
    अब भी ग़ुलामी जारी है
    Rizwan Khoja "Kalp"
    0 Likes
    शोहरत क्या बख़्शेगी हमें
    दुनिया जो ख़ुद नाकारी है
    Rizwan Khoja "Kalp"
    0 Likes
    नफ़रत भरी इस दुनिया में
    हम प्यार के व्यापारी हैं
    Rizwan Khoja "Kalp"
    0 Likes
    हालात ये है मुल्क के
    झूठ अब तो सच पे भारी है
    Rizwan Khoja "Kalp"
    0 Likes
    तू ने ग़ैरों की कही बातें सुनी
    अपना सच हम से सुनाना रह गया
    Rizwan Khoja "Kalp"
    0 Likes
    फ़ासला हम में बस इतना रह गया
    इश्क़ में हम से जताना रह गया
    Rizwan Khoja "Kalp"
    0 Likes

Top 10 of Similar Writers