अपनी जवानी में कमाने आ गया
मिलता हूँ अपने गाँव से अख़बार में
ओछा तिरा लगने लगा रंग-ए-जहाँ
रंगों का कारोबार देखा यार में
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लोग चाहे ज़ुल्म बरताएँ तुझी पर
मुस्कुरा के उन सभी का तू भला कर
मुस्कुरा के उन सभी का तू भला कर
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क्या लुत्फ़ आज़ादी का है
अब भी ग़ुलामी जारी है
अब भी ग़ुलामी जारी है
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फ़ासला हम में बस इतना रह गया
इश्क़ में हम से जताना रह गया
इश्क़ में हम से जताना रह गया
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