Rizwan Khoja "Kalp"

Rizwan Khoja "Kalp"

@rizwankhoja143

Rizwan Khoja "Kalp" shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rizwan Khoja "Kalp"'s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

दर्द की शाम ढल जाएगी
ज़िंदगी फिर सॅंभल जाएगी

Rizwan Khoja "Kalp"

जवानी के दिन फिर से जी लें
चलो बैठ के चाय पी लें

Rizwan Khoja "Kalp"

यारों का यार था वो
दिल की पुकार था वो

Rizwan Khoja "Kalp"

मत पूछ हम से हाल-ए-दिल अज़ीज़ाँ
शब-भर से यादों में जला हुआ है

Rizwan Khoja "Kalp"

रौशन नज़र आता है मजलिसों में
वो शख़्स रातों का जला हुआ है

Rizwan Khoja "Kalp"

अब परिंदा आशियाना ढूँढ़ता है
काट के जंगल वहाँ घर जो बसा है

Rizwan Khoja "Kalp"

उम्र भर मैं ने की है इबादत तिरी
इश्क़ की तब हुई है इनायत तिरी

Rizwan Khoja "Kalp"

माह यूँ ही गुज़रता तिरी याद में
ईद के चाँद सी है मुहब्बत तिरी

Rizwan Khoja "Kalp"

शाना-ब-शाना हैं खड़े दर पे तिरे
छोटा बड़ा कोई नहीं दरबार में

Rizwan Khoja "Kalp"

ना-क़ाबिल-ए-एलान थी चाहत तिरी
हम ज़िक्र करते हैं तिरा अशआर में

Rizwan Khoja "Kalp"

अपनी जवानी में कमाने आ गया
मिलता हूँ अपने गाँव से अख़बार में

Rizwan Khoja "Kalp"

ओछा तेरा लगने लगा रंग-ए-जहाँ
रंगो का कारोबार देखा यार में

Rizwan Khoja "Kalp"

आप ही अनजान हैं मेरे पते से
याद को मालूम घर का रास्ता है

Rizwan Khoja "Kalp"

हम बोलें कुछ या चुप रहा जाए
आख़िर यूँ ही कब तक सहा जाए

Rizwan Khoja "Kalp"

ज़हर भी जम जम समझ कर पी गए हम
ज़ायका तेरे लबों का रस भरा है

Rizwan Khoja "Kalp"

लोग चाहे ज़ुल्म बरताएँ तुझी पर
मुस्कुरा के उन सभी का तू भला कर

Rizwan Khoja "Kalp"

रौशनी मत कर चराग़ों के सहारे
कर उजाला नूर-ए-ईमाँ को जला कर

Rizwan Khoja "Kalp"

साहिब-ए-मसनद ग़ुलामी चाहते हैं
शाह वाले सर झुका के अब चला कर

Rizwan Khoja "Kalp"

सोचता हूँ दर्द अपने फूँक डालूॅं
जिस्म तेरा सर्द रातों में जला कर

Rizwan Khoja "Kalp"

पेड़ गिन काटी थी राहें
ख़र्च गिन कर कट रही है

अम्न की उम्मीद में हैं
और नफ़रत बट रही है

Rizwan Khoja "Kalp"

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