Azhan 'Aajiz'

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    मीर जैसे बोल बोलूँ जॉन जैसी शायरी मैं
    हो ये अन्दाज़े-बयाँ ग़ालिब सा फिर इक़बाल सा मैं

    Azhan 'Aajiz'
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    तुझे रास्तों का पता न था मुझे मंज़िलों की ख़बर नहीं
    तिरा वाक़िआ कोई और था मिरा हादसा कोई और है

    Azhan 'Aajiz'
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    वतन की हो रही अब तो तिजारत है
    मियाँ सौदा-गरों पर अब खिलाफ़त है

    परेशाँ सब हैं ऐसी अब हुकूमत है
    उजाले में भी इतनी यार ज़ुल्मत है

    समझते ही नहीं नादान देखो तो
    कि फैलाई सियासत ने ही नफ़रत है

    हमारे पास बस ये ही है ले लो तुम
    मुहब्बत है मुहब्बत है मुहब्बत है

    मैं सच तो बोल दूँ पर मस'अला ये है
    कि मेरी जान को आनी मुसीबत है

    ज़माना घूम आ जाते हो हम पर ही
    बताओ हम से क्या तुमको अदावत है

    सदाएँ दे रही है मुल्क की मिट्टी
    किसी में बाक़ी क्या अब भी सदाक़त है

    चले आओ भला तुम अब तो अहले-हक़
    वतन को अब तुम्हारी ही ज़रूरत है

    Azhan 'Aajiz'
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    ख़ूबसूरत है चमन वो जिस चमन में तितलियाँ हैं
    दोस्त जन्नत जैसा है घर जिस भी घर में बेटियाँ हैं

    है उदासी बस इसी की एक भाई को कि 'आरिज़'
    क्यूँ लिखीं तक़दीर में बहनों से इतनी दूरियाँ हैं

    Azhan 'Aajiz'
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    तुमसे बिछड़ा तो किधर जाऊँगा
    मय-कदों के मैं नगर जाऊँगा

    मरहला ये है उदासी का अब
    ख़ुश हुआ यार तो मर जाऊँगा

    आसमाँ मैं मुझे रहने दो तुम
    शाम ढलते ही उतर जाऊँगा

    यार आवाज़ लगाए कोई
    मैं यहीं यार ठहर जाऊँगा

    देखिए हाल मिरा ऐसा है
    अब इसी तौर ही मर जाऊँगा

    Azhan 'Aajiz'
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    न की उम्मीद मैंने इस लिए भी
    कि उम्मीदें सितम ढाती हैं मुझ पे

    नहीं अब ख़ाब कोई देखता हूँ
    कि ताबीरें सितम ढाती हैं मुझ पे

    Azhan 'Aajiz'
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    ग़मों की दवा दो मुझे अब
    ज़रा तुम दुआ दो मुझे अब

    किया जुर्म मैंने अगर ये
    यहीं फिर सज़ा दो मुझे अब

    छुपाओ नहीं राज़दाँ कुछ
    हक़ीक़त बता दो मुझे अब

    मुझे वो मुहब्बत मिले भी
    उसी का पता दो मुझे अब

    सुकूँ है किधर अब यहाँ पर
    ज़रा सा दिखा दो मुझे अब

    बुरा यार जो लग रहा हूँ
    इसी पल मिटा दो मुझे अब

    Azhan 'Aajiz'
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    लगाई है सियासत ने वतन मे आग नफ़रत की
    चला दे तू ख़ुदाया जो हवाएँ हैं मुहब्बत की

    दिखाते हैं हुक़ूमत की हमें ताक़त यहाँ अपनी
    दिखा वो तू ज़रा ताक़त ख़ुदा अपनी हुक़ूमत की

    Azhan 'Aajiz'
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    ख़ुद को यहाँ अपना सहारा कर लिया है दोस्तों
    हमने जहाँ से अब किनारा कर लिया है दोस्तों

    Azhan 'Aajiz'
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    मैं यहाँ कुछ शोर करना चाहता हूँ
    ख़ामुशी से अब उभरना चाहता हूँ

    Azhan 'Aajiz'
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