Atul Kumar

Top 10 of Atul Kumar

    जब भी होता है परेशान चला जाता है
    जाने किस सम्त मेरा ध्यान चला जाता है

    मुझ को तो हक़ भी नहीं देता वो कुछ कहने का
    शिकवा करता हूँ तो इंसान चला जाता है

    तुम जताया न करो सब से ये बातें अपनी
    तुम जताते हो तो एहसान चला जाता है

    मैं वो दीवार हूँ जो गिरती नहीं झोंकों से
    मुझ से टकरा के ये तूफ़ान चला जाता है

    इक सराए सा बना रक्खा है दिल को तुम ने
    हर कोई जान न पहचान चला जाता है

    जब भी चाहा के सुना दूँ उसे ग़म अपना तो
    बन के वो शख़्स भी अंजान चला जाता है

    अब 'अतुल' ग़म न करो उस के चले जाने का
    एक मुद्दत पे तो मेहमान चला जाता है
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    Atul Kumar
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    अपने शिकवों को पाल कर बैठा
    वस्ल के दिन मलाल कर बैठा

    अपनी हालत सुधर न पाई तो
    मैं ख़ुदा से सवाल कर बैठा

    अब मेरा दिल भी मुझ से कहता है
    यार तू भी कमाल कर बैठा

    इक मकाँ तोड़ के मिरे अंदर
    काम तू बेमिसाल कर बैठा

    तू बता तू तो जानता है सब
    क्यूँ मैं ख़ुद का ये हाल कर बैठा
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    Atul Kumar
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    बात करते नहीं हैं हम लेकिन
    इश्क़ अब भी नहीं है कम लेकिन

    साथ जीना कहाँ मुयस्सर है
    फिर भी कोशिश करेंगे हम लेकिन

    वो समझता है मर गया हूँ मैं
    मुझ में बाकी है अब भी दम लेकिन

    अब मुहब्बत मुझे डराती है
    चाहता हूँ मैं इक सनम लेकिन

    तेरी यादों से दूर जाता हूँ
    पीछा करता है तेरा ग़म लेकिन

    और कितना तुझे पुकारूँ मैं
    आख़िरी हो मिरा जनम लेकिन

    तेरी चाहत के मेरा दम निकले
    मेरे मौला का है करम लेकिन

    सामने है ये मय-कदा मेरे
    फिर भी पीना पड़ेगा ग़म लेकिन
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    Atul Kumar
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    उस की कोई ख़बर नहीं यारों
    फिर भी कोई असर नहीं यारों

    फूल खिलते हों जिनपे चाहत के
    ऐसा कोई शजर नहीं यारों

    मेरे ग़म को जो पढ़ सके इक बार
    ऐसी कोई नज़र नहीं यारों

    मैं ने गर्दिश में आज़माया था
    कोई भी हम सफ़र नहीं यारों

    जाम छलका ये हाथ से मेरे
    और हम को ख़बर नहीं यारों

    अब भटक जाता हूँ मुहल्ले में
    पहले सा ये नगर नहीं यारों

    इक दफ़ा में समझ गया हूँ मैं
    इश्क़ अब इस क़दर नहीं यारों

    इस लिए हम से सब परेशाँ हैं
    हम में कोई हुनर नहीं यारों

    हाथ चू
    मेंगे हम अतुल किस के
    अब कोई मो'तबर नहीं यारों
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    Atul Kumar
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    चलो इक बार फिर से इस्तिख़ारा कर लिया जाए
    वगरना आप से कम पे गुज़ारा कर लिया जाए

    अगर पहली मोहब्बत से शिकस्ता हो गया दामन
    मिले दिल से इजाज़त तो दुबारा कर लिया जाए

    ये साँपों का नगर है हम को इस
    में बच के रहना है
    झटक कर अपने बाज़ू को किनारा कर लिया जाए

    नहीं लगता कि अब ये फ़ैसला हक़ में मेरे होगा
    न मुमकिन फ़ाइदा हो तो ख़सारा कर लिया जाए

    कहाँ अब चाहता हूँ मैं कभी हो तू मेरा फिर से
    तिरे इस जादू टोने का उतारा कर लिया जाए
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    Atul Kumar
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    इक तिरी मुस्कान पर मैं आ लुटा दूँ आसमाँ
    और जो तू हो ख़फ़ा तो मैं झुका दूँ आसमाँ

    तेरे क़दमों में पड़ा था कल तलक मैं धूल सा
    आज कह दे तू अगर तुझ को बना दूँ आसमाँ

    चाँद जब पूछेगा मुझ से है कहाँ तेरी वफ़ा
    तब उठा उस को नज़र मैं फिर दिखा दूँ आसमाँ

    आज मुझ को दे रही हैं धोखा मेरी धड़कनें
    पूछती हैं नाम ले कर क्या दिला दूँ आसमाँ

    आज कल मिसरों में मेरे रब्त तक मिलता नहीं
    अब ग़ज़ल क्या कहने को काग़ज़ बना दूँ आसमाँ
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    Atul Kumar
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    चाहे किसी पे हो न असर जागते रहो
    आगाह कर रहा है सफ़र जागते रहो

    कहती है ज़िंदगी के ख़ुशी से गुज़ार दो
    आँखें भले हो बंद मगर जागते रहो

    अख़बार दे दिलासे, ख़बर जागते रहो
    सब लोग जा रहे हैं किधर जागते रहो

    मुमकिन नहीं मिले ये सभी कारवाँ हमें
    रस्ते पे भी रखो ये नज़र जागते रहो

    वो मुझ से कह रहा है के दिल भी भरा नहीं
    जारी है हादसों का सफ़र जागते रहो

    जो मेरा था कभी वो मेरा हो नहीं रहा
    अब कैसे काटें हम ये सफ़र जागते रहो

    तितली से एक फूल ने ली थी यही ख़बर
    माली ने बेचा उस को किधर जागते रहो

    आगे हैं और मंज़िलें तेरी ही मुंतज़िर
    कहता है मेरा अज़्म ए सफ़र जागते रहो

    जंगल शिकारियों से भरा है सो पंछियों
    आगाह कर रहा है शजर जागते रहो
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    Atul Kumar
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    आख़िरी है ये जाम मत पूछो
    कैसे गुज़रेगी शाम मत पूछो

    मैं तो ग़म बेचने ही आया हूँ
    न ख़रीदो तो दाम मत पूछो

    आज बिखरा पड़ा है राहों में
    हालत-ए-दिल तमाम मत पूछो

    बचपना भी अलग सा था मेरा
    कैसे तोड़े थे आम मत पूछो

    इस धधकते हुए से सीने में
    कौन है बेलगाम मत पूछो

    लौट कर आ रहे हैं वापस क्यूँ
    कोई तो होगा काम मत पूछो

    तुम से गर हो सके तो प्यास बुझाओ
    कितने हैं तिश्ना काम मत पूछो

    जिस से है इश्क़ मुझ को तुम ही हो
    यार अब तुम तो नाम मत पूछो

    आज कल वो हमें नहीं मिलता
    कब किया था सलाम मत पूछो
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    Atul Kumar
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    ज़िंदगी का ये इशारा है मुझे
    अच्छे लोगों ने बिगाड़ा है मुझे

    कौन था वो शख़्स जिस से इश्क़ था
    उस हसीं से ही ख़सारा है मुझे

    ख़्वाब देखा था इन आँखों ने कभी
    रात ने अब ताना मारा है मुझे

    मान अपना आसमाँ छूने चला
    अब तो ग़ैरों का सहारा है मुझे

    आई है आवाज़ किस की? कान तक
    कौन है जिस ने पुकारा है मुझे

    शख़्स वो पलकों पे रहता था मेरी
    जिस ने नज़रों से उतारा है मुझे
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    Atul Kumar
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    कहाँ सब सुन सकेंगे ये तरन्नुम मेरी ग़ज़लों का
    मिरे अश्कों का वो पानी क़लम के काम आएगा
    Atul Kumar
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