Amit Gautam

Top 10 of Amit Gautam

    पाई पाई को कमाने में पसीना आ गया
    ज़िंदगी की दोपहर में मुझ को जीना आ गया

    ऐश में ही कट रही थी यूँ तो अपनी ज़िंदगी
    पर भँवर में याद काशी और मदीना आ गया

    कश्मकश के जब समुंदर में लगे हम डूबने
    एक उम्मीदों भरा देखो सफ़ीना आ गया

    बे-वफ़ाई का हुआ जब ज़िक्र अहल-ए-बज़्म में
    आप के माथे पे काहे को पसीना आ गया

    जब लगा मंज़िल हमारे है बहुत नज़दीक सी
    तब अचानक सामने फिर एक ज़ीना आ गया
    Read Full
    Amit Gautam
    10
    1 Like
    आलमरुस्वाई है और कुछ नहीं है
    रह गई तन्हाई है और कुछ नहीं है

    जो मुसलसल साथ मेरा दे रही है
    बस मेरी परछाई है और कुछ नहीं है

    तुम पहाड़ों सा उसे हो क्यूँ बनाते
    बात जो इक राई है और कुछ नहीं है

    आप की गुस्ताख़ियों पे चुप खड़े हैं
    ये मेरी अच्छाई है और कुछ नहीं है

    आए ख़ाली हाथ थे जाना है ख़ाली
    इक ये ही सच्चाई है और कुछ नहीं है
    Read Full
    Amit Gautam
    9
    1 Like
    ये अश्कों भरी दास्तान-ए-मुहब्बत
    लगी है ये फिर क्यूँ लुभाने मुहब्बत

    न रातों की चिंता न दिन का ठिकाना
    लगी जिस्म-ओ-जाँ पे है छाने मुहब्बत

    हैं हम वो अनाड़ी जो उल्फ़त में हारे
    मुहब्बत का ये खेल जाने मुहब्बत

    थी दिलकश कभी जो है अब दर्द-ए-सर वो
    मेरा सर लगी है ये खाने मुहब्बत

    मुहब्बत के सागर में मर ही न जाएँ
    कि हम को लगी है डुबाने मुहब्बत
    Read Full
    Amit Gautam
    8
    1 Like
    अक़्ल पर पत्थर पड़े हैं
    भाई भाई से लड़े हैं

    पेड़ जो नफ़रत के हैं वो
    मुँह उठाए क्यूँ खड़े हैं

    लाशें ही लाशें बिछीं पर
    आक़ा लड़ने पर अड़े हैं

    ख़ुद की रोटी बाँट दें जो
    दिल के तो वो ही बड़े हैं

    चोर भी कलयुग में अब तो
    तान कर सीना खड़े हैं
    Read Full
    Amit Gautam
    7
    1 Like
    बन गए नासूर मेरे दिल के छाले
    पर मुझे मंज़ूर मेरे दिल के छाले

    आह पर हर शख़्स मेरी वाह करता
    लुत्फ़ हैं भरपूर मेरे दिल के छाले

    तालियों की गूंज में हर दर्द छुपता
    बज़्म में मशहूर मेरे दिल के छाले

    वस्ल के दिन बन गए है हिज्र में दाग़
    हाए रे मजबूर मेरे दिल के छाले

    जो छुड़ा के हाथ मेरा हो गई ग़ैर
    उस का है सिंदूर मेरे दिल के छाले
    Read Full
    Amit Gautam
    6
    2 Likes
    तुझ से मिलने की आस रहती है
    और हमेशा ये प्यास रहती है

    ढूँढ़ने से भी वो नहीं मिलती
    जो मेरे आस पास रहती है

    मेरी दुल्हन बनेगी तू इक दिन
    लड़की फिर क्यूँ उदास रहती है

    उस को आवाज़ दो तो आएगा
    दिल को इस की कयास रहती है

    हार कर थक गया हूँ मैं लेकिन
    जीत की अब भी आस रहती है
    Read Full
    Amit Gautam
    5
    1 Like
    तुम बतलाओ भाती हैं क्या ग़ज़लें मेरी
    दिल को भी छू जाती हैं क्या ग़ज़लें मेरी

    जब रातों को सोती हो तुम आँखें मीचे
    ख़्वाबों में भी आती हैं क्या ग़ज़लें मेरी

    पहले जैसे मुस्काती थी ग़ज़लें सुन कर
    दिल अब भी धड़काती हैं क्या ग़ज़लें मेरी

    अब तो कोसों दूरी हम में रहती है पर
    तुम को मुझ तक लाती हैं क्या ग़ज़लें मेरी
    Read Full
    Amit Gautam
    4
    2 Likes
    ज़िंदगी हम को भारी लगती है
    हर किसी से ये हारी लगती है

    जी लिए हम जहाँ में अपने पल
    मौत से अब तो यारी लगती है

    ज़िंदगी महफ़िलों में गुज़री पर
    तन्हा हम ने गुज़ारी लगती है

    चोट पर चोट दे गई वो तो
    वो हमें फिर भी प्यारी लगती है

    लाख कोशिश पे जो न उतरे वो
    ये अजब सी ख़ुमारी लगती है

    ख़त्म कर दी जो लिखके काग़ज़ पे
    वो कहानी तो जारी लगती है

    साफ-गोई से उस ने ठुकराया
    हम को फिर क्यूँ हमारी लगती है
    Read Full
    Amit Gautam
    3
    1 Like
    दबे होंठ से मुस्कुराती है अब भी
    वो लड़की ख़यालों में आती है अब भी

    है मालूम हम को नहीं अब हमारी
    क़सम पर ख़ुदा की वो खाती है अब भी

    शजर के कबूतर को पकड़े शिकारी
    ये दादी कहानी सुनाती है अब भी

    सयाना है बेटा हुई माँ भी बूढ़ी
    मगर वो दुखों को छुपाती है अब भी

    कमाया है पैसा कमाई है शोहरत
    मगर ज़िंदगी तो रुलाती है अब भी
    Read Full
    Amit Gautam
    2
    2 Likes
    बैठे बैठे उफ़ ये आफ़त हो गई
    एक दिन हम को मुहब्बत हो गई

    हम समझते थे जिसे आफ़त तमाम
    अब हमें उस की ही आदत हो गई

    सुब्ह की पहली किरण के साथ में
    देखने की उन को हसरत हो गई

    अब चलो इतनी तो राहत हो गई
    चूमने की अब इजाज़त हो गई

    देखते ही देखते हम लुट गए
    हम को भारी ये शराफ़त हो गई

    जो इमारत ढह गई थी इश्क़ की
    उस इमारत की मरम्मत हो गई

    मय लगाकर होंठ से वो बोलते
    अब हमारी तो इबादत हो गई

    रात भर पलकें उठीं पलकें गिरीं
    आँखों आँखों में शरारत हो गई

    हम क़यामत पर न उन से मिल सके
    हाए ये कैसी क़यामत हो गई
    Read Full
    Amit Gautam
    1
    2 Likes