तजरबा ये भी कम नइँ निकला
तुझ से बिछड़ कर दम नइँ निकला
तुझ से बिछड़ कर दम नइँ निकला
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इश्क़ की गगरी जब तुम ने फोड़ी थी
दर्द-ए-दिल ने सारी हद तोड़ी थी
दर्द-ए-दिल ने सारी हद तोड़ी थी
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मुँह पर सच कहने की आदत है
याँ इज़्ज़त है तुम्हारी रहने दो
याँ इज़्ज़त है तुम्हारी रहने दो
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जवानी,जोश में मग़रूर है लड़की
बुढ़ापे का नहीं शायद पता उस को
बुढ़ापे का नहीं शायद पता उस को
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