10
7 Likes
9
6 Likes
सियाने आदमी हो, इश्क़ के चक्कर में मत पड़ना
तुम्हें बर्बाद कर देगा, तुम्हें अच्छा बना देगा
Read Fullतुम्हें बर्बाद कर देगा, तुम्हें अच्छा बना देगा
8
13 Likes
करवट-करवट घूँट-घूँट भर, स्याह रात गुज़री ऐसे
नींद किसी ने तह कर के, अलमारी में रख दी जैसे
नींद किसी ने तह कर के, अलमारी में रख दी जैसे
7
12 Likes
कुछ बातें ख़ुद तक ही रखना, बातों के पर होते हैं
शहर में पक्के कान लिए, सब दीवार-ओ-दर होते हैं
शहर में पक्के कान लिए, सब दीवार-ओ-दर होते हैं
कुछ लोगों को हम ने परखा, कुछ ने हमें हिदायत दी
यक़ीं रखो, तो ख़ुद पर रखना, झूठे रहबर होते हैं
ग़लती कर के पछताना , तो इंसानों की फ़ितरत है
और इल्ज़ाम ज़माने भर के, ख़ुदा के सर पर होते हैं
इक झूठी उम्मीद से बेहतर सच्ची ना-उम्मीदी है
ख़ैर, गुलिस्ताँ आख़िर में सब, बंजर-बंजर होते हैं
उन से कहना, ख़्वाब ज़रा सिरहाने रख कर सो जाएँ
जागी आँखों में फिर काले घेरे अक्सर होते हैं
क्यूँ कोई 'अल्फ़ाज़' किसी को नज़र करे अश'आर कभी
बे-ख़तरी हो तब भी दिल के अपने ही डर होते हैं
6
12 Likes
रूठने वाले को इक हद तक मनाना चाहिए
ज़िन्दगी जब कुछ सिखाए सीख जाना चाहिए
ज़िन्दगी जब कुछ सिखाए सीख जाना चाहिए
रोज़ खोने का है डर, तो डर ख़तम कर दीजिए
एक ही बारी में खो कर भूल जाना चाहिए
एक अर्से से नहीं सोए थे उन की याद में
कमबख़त इस ख़्वाब को भी नींद आना चाहिए
ग़ौर से देखो कि ये दुनिया बड़ी दिलचस्प है
हर तमाशाबीन को कोई ठिकाना चाहिए
आज दिल मायूस है ना जाने अब किस बात पे
हर दफ़ा इस को नया कोई बहाना चाहिए
उफ़, मिरी ये शक्ल पहचानी सी दिखती है मुझे
याद आया, मुझ को अक्सर मुस्कुराना चाहिए
कैफ़ियत दिल की बयाँ 'अल्फाज़' कैसे हम करें
दो घड़ी की उम्र है और इक ज़माना चाहिए
5
11 Likes
4
12 Likes
सुबह-सुबह ये आफ़ताब कौन लाया है
बड़ी मशक़्क़तों से चाँद को सुलाया है
बड़ी मशक़्क़तों से चाँद को सुलाया है
धुआँ सा उठ रहा है कब से मेरी आँखों में
बुझा दे जिस किसी ने दिल मेरा जलाया है
3
15 Likes
नए मौसम में फिर तुम हम मिलेंगे देखना
तुम्हारे ग़म से अपने ग़म मिलेंगे देखना
तुम्हारे ग़म से अपने ग़म मिलेंगे देखना
किसी ने कह दिया कमतर अरे छोड़ो मियाँ
जहाँ ढूँडोगे ख़ुदस कम मिलेंगे देखना
कभी गर एक जुगनू ने दिखाया हौसला
कई महताब फिर मद्धम मिलेंगे देखना
इधर शिकवे रखे हैं और उधर रुस्वाइयाँ
जिधर देखो यही आलम मिलेंगे देखना
ख़ुदाया है कहाँ तू इस तरफ़ भी देख ले
वगरना हर तरफ़ मातम मिलेंगे देखना
वो जिस की पीठ पर ख़ंजर के ज़्यादा घाव हैं
उसी के पास हाँ मरहम मिलेंगे देखना
संभलना के लबों को छू न पाएँ उँगलियाँ
दहकती आग से रेशम मिलेंगे देखना
बयाँ 'अल्फ़ाज़' अपनी तिश्नगी जो कर गए
ये सूखे अब्र फिर पुर-नम मिलेंगे देखना
2
10 Likes
पुराने ग़म भुलाने में ज़ियादा कुछ नहीं लगता
कोई पूछे तो कहना वो हमारा कुछ नहीं लगता
कोई पूछे तो कहना वो हमारा कुछ नहीं लगता
नई रुस्वाइयाँ हर बार मुझ से मिलने आती हैं
मुझे उस की मोहब्बत में पुराना कुछ नहीं लगता
नज़रअंदाज़ कर-कर के तुम अपना क़द बढ़ाते हो
हमारी जान जाती है तुम्हारा कुछ नहीं लगता
ज़रा इक हाथ बढ़ जाए तो शायद थाम भी लें हम
हमारा ख़ुद से होकर तो इरादा कुछ नहीं लगता
ये कैसा नूर है उन
में के बस देखे ही जाते हैं
अब इन आँखों को ये शो'ला शरारा कुछ नहीं लगता
तुम्हें समझा रहा हूँ फिर के सौदा फ़ायदे का है
किसी के दिल में घर कर के किराया कुछ नहीं लगता
कभी 'अल्फ़ाज़' टूटें तो बिखर जाते हैं मिसरों पर
ग़ज़लगोई में वैसे तो हमारा कुछ नहीं लगता
1
15 Likes










