roothne waale ko ik had tak manana chahiye | रूठने वाले को इक हद तक मनाना चाहिए

  - Saurabh Mehta 'Alfaaz'

रूठने वाले को इक हद तक मनाना चाहिए
ज़िन्दगी जब कुछ सिखाए सीख जाना चाहिए

रोज़ खोने का है डर, तो डर ख़तम कर दीजिए
एक ही बारी में खोकर भूल जाना चाहिए

एक अर्से से नहीं सोये थे उनकी याद में
कमबख़त इस ख़्वाब को भी नींद आना चाहिए

ग़ौर से देखो कि ये दुनिया बड़ी दिलचस्प है
हर तमाशाबीन को कोई ठिकाना चाहिए

आज दिल मायूस है ना जाने अब किस बात पे
हर दफ़ा इसको नया कोई बहाना चाहिए

उफ़, मिरी ये शक्ल पहचानी सी दिखती है मुझे
याद आया, मुझको अक्सर मुस्कुराना चाहिए

कैफ़ियत दिल की बयाँ 'अल्फाज़' कैसे हम करें
दो घड़ी की 'उम्र है और इक ज़माना चाहिए

  - Saurabh Mehta 'Alfaaz'

Duniya Shayari

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