
तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे
तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी
डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे
और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
— Tehzeeb Hafi
Other sher from the same pen
Shers of khushboo.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling