इस जहाँ के लिए आँखों में कशिश है ही नहीं
मैं किसी और ही मंज़िल का मुसाफ़िर निकला
मैं किसी और ही मंज़िल का मुसाफ़िर निकला
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हुआ है ज़िंदगी जी कर ख़सारा या रसूलुल्लाह
नहीं बिछड़ेंगे अब तुम से दुबारा या रसूलुल्लाह
नहीं बिछड़ेंगे अब तुम से दुबारा या रसूलुल्लाह
दुआ को हाथ जब उट्ठे हमारा या रसूलुल्लाह
तो उस दम लब पे हो क़लमा तुम्हारा या रसूलुल्लाह
तुम्हारा मैं तुम्हारा मैं तुम्हारा या रसूलुल्लाह
दुलारा हूँ दुलारा हूँ दुलारा या रसूलुल्लाह
मुयस्सर हो मदीने की ज़ियारत जिस घड़ी हम को
हमारे साथ हो कुम्बा हमारा या रसूलुल्लाह
तुम्हारे इश्क़ में किस ने गुज़ारी ज़िन्दगी अपनी
मेरी जानिब भी कर देना इशारा या रसूलुल्लाह
तुम्हारा मर्तबा 'रूपम' के मुँह से हो बयाँ कैसे
तुम्हारी शान में क़ुरआँ है सारा या रसूलुल्लाह
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हम तो मर भी नहीं सके इक साथ
हो गया इश्क़ राएगाँ जानाँ
दिल मुहल्ले की सब दिवारों पर
नज़्म है अपनी दास्ताँ जानाँ
मेरे सीने पे जो चमकते हैं
तेरे क़दमों के हैं निशाँ जानाँ
सारी दुनिया खँगाल बैठे हैं
अपनी मंज़िल है अब कहाँ जानाँ
आँधियों से जो खौफ़ आने लगे
बंद कर लेना खिड़कियाँ जानाँ
रुख़ ये महताब आँखें नीली हैं
चाँद देखूँ या आसमाँ जानाँ
सात जन्मों का साथ हो अपना
था इसी बात का गुमाँ जानाँ
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ज़मीं भाती नहीं और आसमाँ अच्छा नहीं लगता
कहाँ ले जाएँ दिल को ये जहाँ अच्छा नहीं लगता
कहाँ ले जाएँ दिल को ये जहाँ अच्छा नहीं लगता
मेरा दम शहर में घुटता है कुछ दुख गाँव में भी हैं
यहाँ अच्छा नहीं लगता वहाँ अच्छा नहीं लगता
वो अपने हाथ से जुगनू नहीं ऊपर उड़ाता तो
सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
हमारें घर में भी ख़ुशियाँ सभी मौजूद हैं लेकिन
हमें बरसात में अपना मकाँ अच्छा नहीं लगता
नहीं हो हम-सफ़र जब साथ तब तन्हा मुसाफ़िर को
सड़क से हर गुज़रता कारवाँ अच्छा नहीं लगता
किसी की चाह में जब से हुए बर्बाद हम को 'मीत'
यक़ीं अच्छा नहीं लगता गुमाँ अच्छा नहीं लगता
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मुफ़लिस की बद-दुआ हूँ मुझे मार दीजिए
मैं आप इक बला हूँ मुझे मार दीजिए
मैं आप इक बला हूँ मुझे मार दीजिए
उस से बिछड़ के उस की मुहब्बत की आग में
मुद्दत से जल रहा हूँ मुझे मार दीजिए
हासिल मुझे करेंगे तो तड़पेंगे उम्र भर
मैं दर्द-ए-ला-दवा हूँ मुझे मार दीजिए
क्या कुछ न कर चुका हूँ मैं जीने के वास्ते
पर अब मैं थक चुका हूँ मुझे मार दीजिए
ख़ुद अपनी जान लूँगा तो दोज़ख में जाऊँगा
मैं ख़ुल्द चाहता हूँ मुझे मार दीजिए
परवाज़ कर न पाएँगे सोहबत में मेरी आप
मैं ऐब देखता हूँ मुझे मार दीजिए
हर पैदा होने वाले को लाज़िम है इंतिक़ाल
इस हक़ से बोलता हूँ मुझे मार दीजिए
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जब आँखों को दरिया करने का मन हो
तब मेरी रूदाद-ए-ग़म सुनना जानाँ
दिन से रात तलक मैं तुम को रोता हूँ
तुम भी मुझ को आठ-पहर रोना जानाँ
अपने हाथ के कंगन जा पर रखना तुम
वाँ पर मेरी ग़ज़लें मत रखना जानाँ
तुम रिश्तों में मत ढूँडो ख़ुशियाँ सारी
सीखो ख़ुदस मिल कर ख़ुश होना जानाँ
आज जला दी वो वाली फ़ोटो जिस
में
सूट तुम्हारे जिस्म पे था काला जानाँ
तुम से पहले मैं ख़ुश रहता था लेकिन
बा'द तुम्हारे रंज-ओ-ग़म रहता जानाँ
चार महीने खेल के दिल को तोड़ दिया
मेरा दिल क्या एक खिलौना था जानाँ?
हाए! तुम्हारे लब को देख के लगता है
तुम ने 'मीत' का ख़ून पिया होगा जानाँ
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