हुआ है ज़िंदगी जी कर ख़सारा या रसूलुल्लाह

नहीं बिछड़ेंगे अब तुम से दुबारा या रसूलुल्लाह

दुआ को हाथ जब उट्ठे हमारा या रसूलुल्लाह
तो उस दम लब पे हो क़लमा तुम्हारा या रसूलुल्लाह

तुम्हारा मैं तुम्हारा मैं तुम्हारा या रसूलुल्लाह
दुलारा हूँ दुलारा हूँ दुलारा या रसूलुल्लाह

मुयस्सर हो मदीने की ज़ियारत जिस घड़ी हम को
हमारे साथ हो कुम्बा हमारा या रसूलुल्लाह

तुम्हारे इश्क़ में किस ने गुज़ारी ज़िन्दगी अपनी
मेरी जानिब भी कर देना इशारा या रसूलुल्लाह

तुम्हारा मर्तबा 'रूपम' के मुँह से हो बयाँ कैसे
तुम्हारी शान में क़ुरआँ है सारा या रसूलुल्लाह

— रूपम कुमार 'मीत'

More by रूपम कुमार 'मीत'

Other ghazal from the same pen

See all from रूपम कुमार 'मीत' →

Religion Shayari Collection

Shers of religion shayari collection.

All Religion Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling