diya jala ke usii samt phir hawa na kare | दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे

  - रूपम कुमार 'मीत'
दियाजलाकेउसीसम्तफिरहवाकरे
कियाहैजोमेरेअपनेनेदूसराकरे
उसेहैइल्मबिछड़नेसेलोगटूटेंगे
कभीवोमोतियोंकोडोरसेजुदाकरे
बुज़ुर्गहोगयाहूँज़िंदगीसेइसलिएभी
वोदेखभालकरेपरमेरीदवाकरे
नहींहैख़ौफ़समुंदरमेंडूबनेकामुझे
मगरयूँँक़र्ज़मेंमरनापड़ेख़ुदाकरे
मुहालहैज़मींसेआसमानतककासफ़र
बुलंदियोंपेयूँँजाकरकोईगिराकरे
मैंझूटीज़िंदगीसेअबनजातचाहताहूँ
तवीलउम्रकीमेरीकोईदु'आकरे
ख़ुदाक़ुबूलकरेआख़रीदु'आयेमेरी
वोमेरेबा'दकिसीऔरकाबुराकरे
हमेंभीहक़हैयहाँसरउठाकेजीनेका
ज़मानातल्ख़-बयानीसेतब्सिराकरे
तुम्हारीज़ुल्फ़तोबिखरेगीउँगलियोंसेमेरी
बसइसकाध्यानरहेयेकहींहवाकरे
मैंअपनेदिलसेतेरादिलनिकालफेंकूँगा
मैंवोनहींहूँजोवा'दाकरेवफ़ाकरे
येभागदौड़भराशहरहैज़राठहरो
किसीकेवास्तेकोईयहाँरुकाकरे
मुक़ाम-ए-फ़ख़्रपेलबसेयेबद-दुआनिकली
हमारेसाथज़मानाचलेख़ुदाकरे
  - रूपम कुमार 'मीत'
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Budhapa Shayari

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