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Shayari
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Top 10 of
kapil verma
SHER
नुमाइश है यहाँ लगती जमाल-ए-जिस्म की हर-सू
बिखेरा जिस क़दर इस्मत को उतना दाम लगता है
kapil verma
10
SHER
वरक़ पर आज के बरसों में ठहरा है फ़लक आओ
लिखें ज़िंदान में भी नज़्म हम उनवान जो भी हो
kapil verma
9
SHER
क्यूँँ है तेग़ लफ़्ज़ों की बात-बात में शामिल
ख़ामुशी से मुझ को भी बे-सिपर करे कोई
kapil verma
8
SHER
सब कुछ कमाल और नया सा लगा था तब
हर शय है अब हमारी तवज्जोह की आस में
kapil verma
7
SHER
हयात आए कहाँ से हलाक ज़र्रों में
ज़ुहूर क़ैद किए बिन नहीं रवाई दे
kapil verma
6
NAZM
"वीराने खंडर"
— kapil verma
5
GHAZAL
बारहा दिल मचलता रहा रात भर
करवटें वो बदलता रहा रात भर
kapil verma
4
GHAZAL
है शुक्र तिश्नगी में तो ग़रीब हूँ मैं नहीं
पसंद तुम हो भले ही क़रीब हूँ मैं नहीं
kapil verma
3
GHAZAL
मिलता उसे है छब मिरा हर ग़म-शनास में
भरती हैं सिसकियाँ सबा भी मेरे पास में
kapil verma
2
NAZM
"तेरे पीछे हम खड़े"
— kapil verma
1
Siddharth Saaz
Vikas Shah musafir
Dipendra Singh 'Raaz'
Manish watan
Aadil Sulaiman
Zafar Siddqui
Upendra Bajpai
Sohit Singla
Rudransh Trigunayat
Neeraj Naveed