तेरी तासीर से कुछ मेल खा जाए इसी ख़ातिर
मैं तोहफ़े में गुलाबों से सजा गुलदान लाई हूँ
तमन्ना है दिवाली में दिया इक जल उठे ऐसा
जला दे फ़ासले सारे हमारे दरमियाँ जो हैं
कुछ बेटियाँ बिन बाप के भी काटती हैं ज़िंदगी
कुछ बेटियों के सिर पे दोनों हाथ माँ के होते हैं
गाड़ी केतन मोटर ज़ेवर सब कैसे ले लें साहब
हम मज़दूरी करते हैं पहले बच्चों को पालेंगे
मैंने चाहा भी तो इक ऐसे मनमौजी लड़के को
जो मरता है अक्सर लाखों फूलों के आकारों पे