संसार को बेहद ज़ालिम जान लिया मैं ने
फिर उस से मिला हाथों को चूम दिया मैं ने
Read Fullफिर उस से मिला हाथों को चूम दिया मैं ने
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एक और वा'दा उस ने किया मोहब्बत का
पिछले साल भी ऐसे वादे से वो मुकरी थी
पिछले साल भी ऐसे वादे से वो मुकरी थी
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ये तुम रोज़ किस दरिया में बह रहे हो
ये दिल ख़ाली है, तुम कहाँ रह रहे हो
ये दिल ख़ाली है, तुम कहाँ रह रहे हो
ये मैं हूँ कि ग़म में लिखे जा रहा हूँ
वो कहते हैं अच्छी ग़ज़ल कह रहे हो
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अरे ख़ुद-कुशी करने वाले ज़रा रुक
वतन पर मरो ऐसे क्या मर रहे हो
वतन पर मरो ऐसे क्या मर रहे हो
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ये सोचा था ग़रीबी को किताबों से मिटाऊँगा
न था मालूम मैं भूखा किताबें ही खा जाऊँगा
न था मालूम मैं भूखा किताबें ही खा जाऊँगा
मिरे कंधों पे घर का बोझ आता जा रहा है अब
मैं अब ख़्वाबों को बाहर का ही रास्ता तो दिखाऊंँगा
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