उसे याद कर के जिए जा रहें हैं
ख़ला हैं जिसे हम पिए जा रहें हैं
ख़ला हैं जिसे हम पिए जा रहें हैं
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किताबों ने दबा कर के रखें है राज़ सीने में
ज़रा इनको कभी खोलो मज़ा आएगा जीने में
ज़रा इनको कभी खोलो मज़ा आएगा जीने में
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शहर तेरा छोड़ कर मैं जा रहा हूँ रोक ले
ग़म हैं लेकिन फिर भी मैं यूँ गा रहा हूँ रोक ले
ग़म हैं लेकिन फिर भी मैं यूँ गा रहा हूँ रोक ले
था बड़ा मुश्किल ये सब कुछ छोड़ कर जाना मगर
ख़्वाबों को मैं दफ़्न कर के जा रहा हूँ रोक ले
दास्ताँ इक मेरी जिस को पूरा होना था कभी
मैं अधूरा छोड़ उस को जा रहा हूँ रोक ले
मैं पलट सकता हूँ तू आवाज़ तो दे इक दफ़ा
मैं ख़मोशी तेरी अब सुन पा रहा हूँ रोक ले
देखा था इक बार मैं ने उस को यूँ हँसते हुए
नग़्में उस के अब तलक मैं गा रहा हूँ रोक ले
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कितना रोया हूँ हर शब मैं बता नहीं सकता
वो मिरा है ये भी अब मैं जता नहीं सकता
वो मिरा है ये भी अब मैं जता नहीं सकता
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कहते हैं वो ज़िंदगी में उन के कोई ग़म नहीं हैं
क्या ये कम हैं यारों क़िस्मत में ही उन की हम नहीं हैं
क्या ये कम हैं यारों क़िस्मत में ही उन की हम नहीं हैं
मुफ़्त में जो मिल गया तो सस्ता मुझ को जाना, लेकिन
दाम मेरा पूछ लो लाखों से भी इक कम नहीं हैं
बा'द तेरे मैं किसी का भी नहीं हो पाया दिल से
वरना मेरे चाहने वाले जहाँ में कम नहीं हैं
चाहूँ गर तो आज भी मैं तुझ को अपना लूँ बना पर
यार इन सब बातों में अब कोई भी तो दम नहीं हैं
सबके पछतावे हैं अपनी ज़िंदगी के इस जहाँ में
झूठे हैं वो लोग जो कहते हैं कोई ग़म नहीं हैं
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