बेवफ़ाओं से है उमीद-ए-वफ़ा
वहम का टूटना ही बेहतर है
वहम का टूटना ही बेहतर है
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मेरे दिल में भी घर कर गई ख़ामोशी
उस ने भी कुछ यार तवज्जोह कम कर दी
उस ने भी कुछ यार तवज्जोह कम कर दी
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ऐ इश्क़ बे-मिसाल तू होगा जिसे भी हो
मेरी नज़र में आज से तू जाल-साज़ है
मेरी नज़र में आज से तू जाल-साज़ है
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अधूरी ख़्वाहिशें जीने न देंगी
मगर हर हाल में जीना पड़ेगा
मगर हर हाल में जीना पड़ेगा
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