शराफ़त ठीक पर इतनी न होनी चाहिए
    समय के साथ ख़ुद को भी बदलते जाइए

    यही हुश्यार होने का तरीका है यहाँ
    हमारी मानिए तो ख़ूब धोखे खाइए
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    Kush Pandey ' Saarang '
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    बड़ी मुश्किल हुई है ज़िंदगी आसान करने में
    कमी होती है हर इक शख़्स की पहचान करने में

    जो कत्लेआम कर संसद की सीढ़ी पार करते हैं
    लगा दो ताकतें ऐसों का तुम गुनगान करने में

    मिरी आँखों में दुनिया को कहीं पानी नहीं मिलता
    लगा दीं मुद्दतें आँखों को रेगिस्तान करने में

    इसे लग जाए आ के राम का इक तीर इस ख़ातिर
    मिरे मन का हिरन भी व्यस्त है अब ध्यान करने में

    शुरू होते ही जंगें सोचते दोनों तरफ हैं लोग
    हुई है भूल हम से जंग का ऐलान करने में
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    Kush Pandey ' Saarang '
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    हया गहना है औरत के बदन का
    वो मतलब जानती है हर छुअन का
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    ये भी कैसी मजबूरी है
    दोनों के बीच में दूरी है

    तय है उसका नेता बनना
    जिसके हाथ में छूरी है
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    Kush Pandey ' Saarang '
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    जवानी चार दिन की चार दिन की जिंदगी है
    इसी में प्यार करना और खुदा की बंदगी है
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    रोने से तो मन हल्का हो जाएगा
    बाकी ग़म सारे याद रहेंगे तुमको
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    बुरा लड़का हूँ ये समझा करो तुम
    भले लोगों की ये दुनिया नहीं है
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    हर किस्से को खत्म ही होना होता है
    एक कहानी चल सकती है सदियों तक

    सागर तक जाना पड़ता है नदियों को
    सागर कब जाता है जानाँ नदियों तक
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    ज़रा चेहरा तो हमको तुम दिखा दो
    न जाने कब ये दुनिया छोड़ जाऊं
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    नदी से सीखता हूँ रोज बहना
    शजर सा बाँह फैलाए रहा मैं

    मिरा परचम मुहब्बत का था साहब
    उसे हरदम ही लहराए रहा मैं
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    Kush Pandey ' Saarang '
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