शराफ़त ठीक पर इतनी न होनी चाहिए
समय के साथ ख़ुद को भी बदलते जाइए
समय के साथ ख़ुद को भी बदलते जाइए
यही हुश्यार होने का तरीका है यहाँ
हमारी मानिए तो ख़ूब धोखे खाइए
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बड़ी मुश्किल हुई है ज़िंदगी आसान करने में
कमी होती है हर इक शख़्स की पहचान करने में
कमी होती है हर इक शख़्स की पहचान करने में
जो कत्लेआम कर संसद की सीढ़ी पार करते हैं
लगा दो ताकतें ऐसों का तुम गुनगान करने में
मिरी आँखों में दुनिया को कहीं पानी नहीं मिलता
लगा दीं मुद्दतें आँखों को रेगिस्तान करने में
इसे लग जाए आ के राम का इक तीर इस ख़ातिर
मिरे मन का हिरन भी व्यस्त है अब ध्यान करने में
शुरू होते ही जंगें सोचते दोनों तरफ़ हैं लोग
हुई है भूल हम से जंग का ऐलान करने में
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हया गहना है औरत के बदन का
वो मतलब जानती है हर छुअन का
वो मतलब जानती है हर छुअन का
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जवानी चार दिन की चार दिन की ज़िन्दगी है
इसी में प्यार करना और ख़ुदा की बंदगी है
इसी में प्यार करना और ख़ुदा की बंदगी है
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नदी से सीखता हूँ रोज़ बहना
शजर सा बाँह फैलाए रहा मैं
शजर सा बाँह फैलाए रहा मैं
मिरा परचम मुहब्बत का था साहब
उसे हरदम ही लहराए रहा मैं
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