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तेरी याद में इक ग़ज़ल ऐसी गुज़री
लहू रो रहा था क़लम लिखते लिखते
लहू रो रहा था क़लम लिखते लिखते
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माँ की करते हुए ख़िदमत मुझे आ जाए क़ज़ा
ऐ ख़ुदा एक ये बेटे की दुआ है तुझ से
ऐ ख़ुदा एक ये बेटे की दुआ है तुझ से
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दोस्ती में हो रहे हैं आज जो वादे वफ़ा
ये हबीब इबने मज़ाहिर आप का एहसान है
ये हबीब इबने मज़ाहिर आप का एहसान है
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